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Friday, 17 September 2021

डॉक्टर साहब, इस प्रिस्कीप्शन में आपने जो दवाइयां लिखी हैं...


पेशेंट :-डॉक्टर साहब, इस प्रिस्कीप्शन में आपने जो दवाइयां लिखी हैं, उनमें से सबसे ऊपर वाली नहीं मिल रही है।
डॉक्टर : वो दवाई नहीं है, मैं तो पेन चलाकर देख रहा था,चल रहा है कि नहीं ...!!!
पेशेंट : मैं 52 मेडिकल शॉप घूम के आया हूं आपकी हैंडराइटिंग के चक्कर में।
हे प्रभु एक मेडिकल वाले ने तो ये भी कहा! कल मंगा दूंगा...
दूसरा कह रहा था....ये कंपनी बंद हो गई....दूसरी कंपनी की दूं क्या??
तीसरा कह रहा था....इसकी बहुत डिमांड चल रही है.....ये तो दोगुना दाम में ही मिल पाएगी!
ओफ चौथा तो बहुत ही एडवांस था बोला...ये तो कोरोना थर्ड वेव की एडवांस दवाई है... किसको हो गया अभी से???

पंडित जी ने कुंडली मिलाई, ३६ के ३६ गुण मिल गये...


पंडित जी ने कुंडली मिलाई।
३६ के ३६ गुण मिल गये।
लड़के वालों ने मना कर दिया।
लड़की वाले हैरान हो कर पूछने लगे:
“जब सारे गुण मिलते हैं तो आप मना क्यों कर रहे हैं?”
लड़के वाले: “हमारा लड़का बिलकुल लफ़ंगा है। अब क्या बहु भी उस जैसी ले आयें?”

Wednesday, 28 April 2021

एक आदमी ने भगवान...

 


एक आदमी ने भगवान की बहुत आराधना की तो भगवान उस से प्रसन्न हो गए और उसके समक्ष प्रकट हुए तो वह आदमी भगवान् से बोला,"क्या मै एक सवाल पूछ सकता हूं?"

भगवान ने कहा, "पूछो"।

आदमी: "हे भगवान... करोड़ो साल मतलब तुम्हारे लिए कितने है?"

भगवान: करोड़ो साल मेरे लिए एक सेकंड के बराबर हैं।

उस आदमी को बहुत आश्चर्य हुआ। फिर उस आदमी ने आगे पूछा, "भगवान, करोड़ो रुपये की तुम्हारे लिए कितनी अहमियत रखते हैं?"

भगवान ने कहा, "करोड़ो रुपये मेरे लिए सिर्फ एक पैसे के बराबर हैं"।

आदमी: हे भगवान, तो क्या तुम मुझे एक पैसा दे सकते हो?

भगवान: जरुर. . .सिर्फ एक सेकंड रुको।

बिस्किट बनाने वाली...

 


बिस्किट बनाने वाली कंपनियों को विनम्र निवेदन:

पहले मारी वालो कृपया मारी बिस्किट का आकार कम कीजिये या फिर कप बनाने वाली कंपनी के लोगों से एक बार बात करके तो देखें।

दूसरा Parle G वालों से निवेदन है कि बिस्किट के घोल में थोडा सा अंबुजा सीमेंट भी मिला कर दें। चाय में डुबोते ही ग़श खा कर उसी कप में आत्महत्या कर लेता है।

रस्क डुबो के खाने वालो से निवेदन है कि चाय पीते समय बंगाली भाषा का प्रयोग करें, "अमी चाय खाबो"। एक रस्क चाय में डुबोते ही आधा कप खाली हो जाता है और 2 रस्क में आप चाय खा जाते हैं।

एक आदमी लंगड़ाता हुआ...

 


एक आदमी लंगड़ाता हुआ आ रहा था। उसे देखकर दो डॉक्टर आपस में झगड़ने लगते हैं!

पहला डॉक्टर- लगता है उसके पैर की हड्डी टूट गयी है!

दूसरा डॉक्टर- लगता है उसका अंगूठा टूट गया है!

दोनों में काफी बहस हो रही होती है तो तीसरा डॉक्टर बोलता है चलो उससे ही पूछ लेते हैं!

डॉक्टर- क्या तुम्हारे पैर की हड्डी टूट गयी है!

व्यक्ति- नही मेरी चप्पल टूटी हुई है!

कल मेरा एक जिगरी यार...

 


कल मेरा एक जिगरी यार मुझ से नाराज़ हो गया! बेतहाशा नाराज़।
गलती मेरी ही थी, वजह भी बड़ी वाजिब थी। 
बात ये हुई कि उनकी पत्नी यानी हमारी प्रिय भाभी जी दुर्घटनाग्रस्त हो गयी। एक कोई हड्डी टूट गयी थी।
एक प्रसिद्ध अस्थिरोग (हड्डी रोग) विशेषज्ञ से संपर्क व परामर्श हुआ।

आपरेशन होगा ये तय हो गया।

दोस्त टेंशन में था।

मैंने पूछा खर्चा तो काफ़ी हो जाएगा ना?

हाँ... दोस्त ने सिर हिलाया।

मैंने फिर पूछा: लाखों में?

दोस्त ने फिर हाँ कहा।

बस यहीं मैं गड़बड़ कर बैठा! जब मज़ाक में दोस्त का टेंशन दूर कर के उसे हंसाने के लिए मुंह से निकल गया कि  इतने में तो दूसरी आ जाती यार।

मेरा दोस्त भड़क गया।

यार का गुस्सा होना तो बनता ही है ऐसे टेंशन वाले माहौल में!

उसने एक थप्पड़ मारा और दांत भींच के बोला, "कमीने कुत्ते...
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अब बता रहा है जब जमा करवा दिये हैं!"





पापा जी के बड़े बेटे का...

 


पापा जी के बड़े बेटे का कहना है कि उनका लोकतंत्र पर से यकीन सन 88 में ही उठ गया था, जब हमारी स्कूल की छुट्टियां हुई और रात को खाने की मेज़ पर पापा ने पूछा, "बताओ बच्चों छुट्टियों में दादा के घर जाना है या नाना के?"

सब बच्चों ने खुशी से हम आवाज़ होकर नारा लगाया - "दादा के ..."

लेकिन अकेली मम्मी ने कहा कि "नाना के...।"

बहुमत चूंकि दादा के हक़ में था, लिहाज़ा मम्मी का मत हार गया और पापा ने बच्चों के हक़ में फैसला सुना दिया, और हम दादा के घर जाने की खुशी दिल में दबा कर सो गए।

अगली सुबह मम्मी ने तौलिए से गीले बाल सुखाते हुए मुस्कुरा कर कहा - "सब बच्चे जल्दी जल्दी कपड़े बदल लो हम नाना के घर जा रहे हैं।"

मैंने हैरत से मुँह फाड़ के पापा की तरफ देखा, तो वो नज़रें चुरा कर अख़बार पढ़ने कि अदाकारी करने लगे...

बस मैं उसी वक़्त समझ गया था कि लोकतंत्र में फैसले आवाम की उमंगों के मुताबिक नहीं, बल्कि बंद कमरों में उस वक़्त होते हैं, जब आवाम सो रही होती हैI


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